पीएम श्री विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ संवेदना और नैतिक मूल्यों पर जोर, SEEL प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ
देहरादून । उत्तराखंड के पीएम श्री राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास को लेकर सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम यानी Social, Emotional and Ethical Learning (SEEL) को बढ़ावा देने की पहल शुरू हो गई है। देहरादून स्थित राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान SIEMAT में पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए राज्य स्तरीय SEEL प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक अधिगम की अवधारणा, उसकी उपयोगिता और विद्यालयी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यावसायिक दक्षताओं से परिचित कराना है। कार्यशाला के पहले चरण में उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जनपद के विभिन्न पीएम श्री विद्यालयों से प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला के दौरान SEEL के मूलभूत आयामों और विद्यार्थियों के समग्र विकास में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सामाजिक और भावनात्मक दक्षताओं को शामिल करने के लिए संवादात्मक गतिविधियों, सहयोगात्मक अधिगम, चिंतनपरक अभ्यास, परिस्थिति आधारित चर्चा, समूह कार्य और अनुभवात्मक अधिगम जैसे तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
इस अवसर पर निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बन्दना गर्ब्याल ने कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को ज्ञान और सूचनाओं से समृद्ध करना नहीं है, बल्कि उनमें संवेदनशीलता, आत्मबोध, आत्मानुशासन, सहानुभूति, नैतिक विवेक, जिम्मेदारी और स्वस्थ सामाजिक संबंधों जैसी जीवनोपयोगी क्षमताओं का विकास करना भी जरूरी है।
वहीं उप राज्य परियोजना निदेशक अजित भण्डारी ने कहा कि पीएम श्री विद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में SEEL विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, मूल्यों और व्यवहार के समन्वित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन रहा है, जहां पीएम श्री विद्यालयों में सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम जैसे नवाचारी कार्यक्रम को प्रारम्भ किया जा रहा है।
कार्यक्रम की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. बी.पी. मंड़ोली ने प्रतिभागियों को SEEL के विभिन्न महत्वपूर्ण पक्षों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक और भावनात्मक दक्षताओं का विकास किसी एक अलग विषय तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे विद्यालय की समग्र संस्कृति और रोजमर्रा की शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के सामाजिक और भावनात्मक विकास के प्रमुख संवाहक हैं। ऐसे में शिक्षकों में भी आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, सहानुभूति, संवाद कौशल और नैतिक निर्णय क्षमता जैसे गुणों का होना आवश्यक है।
कार्यशाला में बताया गया कि SEEL का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को पहचानने और नियंत्रित करने, दूसरों के विचारों और भावनाओं को समझने, स्वस्थ संबंध बनाने तथा परिस्थितियों के अनुरूप विवेकपूर्ण और नैतिक निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को अपने विद्यालयों में SEEL की अवधारणाओं को कक्षा-कक्षीय गतिविधियों और विद्यालयी प्रक्रियाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। पहले दिन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि पीएम श्री विद्यालयों को ऐसे जीवंत शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां ज्ञान के साथ संवेदना, उपलब्धि के साथ नैतिकता और शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का समन्वय हो।
यह राज्य स्तरीय कार्यशाला जनपदवार आठ चरणों में आयोजित की जानी है। प्रशिक्षण में राज्य स्तर पर संदर्भदाता के रूप में डायट उत्तरकाशी के प्रवक्ता शान्ति रतूड़ी, एससीईआरटी के प्रवक्ता सुनील भट्ट, प्रिया गुसाईं, डायट चमोली के प्रवक्ता बिरेन्द्र कठैत और रुद्रप्रयाग की सहायक अध्यापिका अमृता नौटियाल विभिन्न सत्रों का संचालन कर रहे हैं। इसके साथ ही लभ्य फाउंडेशन और ड्रीम ए ड्रीम जैसी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिभागी भी प्रशिक्षण में विभिन्न सत्रों का संचालन कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, पीएम श्री विद्यालयों में SEEL की शुरुआत को विद्यार्थियों की शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित रखने के बजाय उनके व्यक्तित्व, व्यवहार, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
