सीएम धामी – Apnu Uttarakhand
देहरादून। हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी को देश की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में उन्होंने साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी दिवस केवल भाषा के उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, सभ्यता, राष्ट्रीय पहचान और जड़ों पर गर्व करने का दिन है। हिंदी ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनकर विविधता में एकता की भावना को मजबूत किया है।
‘हिंदी को डिजिटल दुनिया की भाषा बनाना होगा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे समय में हिंदी को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। हिंदी को विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की भी मजबूत भाषा बनाना होगा।
उन्होंने युवाओं से नई तकनीक और दूसरी भाषाओं का ज्ञान हासिल करने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा पर गर्व बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल हिंदी को दुनिया के हर मंच तक पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए।
भाषा के साथ साहित्य और संस्कृति को बचाने पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि भाषा और साहित्य का संबंध बेहद गहरा है। उन्होंने कहा कि भाषा शरीर है तो साहित्य उसकी आत्मा है। उत्तराखंड ने हिंदी और भारतीय साहित्य को कई महत्वपूर्ण साहित्यकार दिए हैं। राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, चंद्रकुंवर बर्त्वाल और प्रसून जोशी जैसे रचनाकारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन साहित्यकारों ने उत्तराखंड की प्रकृति, लोकजीवन और संवेदनाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाया है।
गढ़वाली-कुमाऊंनी समेत लोकभाषाओं के संरक्षण का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिंदी से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध लोकभाषाओं और बोलियों से भी है। गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी समेत प्रदेश की विभिन्न लोकभाषाएं राज्य की सांस्कृतिक धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।
साहित्यकारों को सम्मान और आर्थिक सहयोग
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के माध्यम से जीवनभर साहित्य साधना करने वाले साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है। वहीं ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत हिंदी सहित गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू समेत विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है।
‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने, ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी पहल के जरिए पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और रचनाकारों को पुस्तक प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान देने का काम भी किया जा रहा है। भाषा संस्थान के माध्यम से उत्तराखंड के अप्रकाशित और बिखरे साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
हिंदी दिवस समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, सचिव भाषा विभाग उमेश नारायण पांडे, निदेशक भाषा मायावती ढकरियाल समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
