राजकीय शिक्षक संघ ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा को लिखा पत्र, संगठनात्मक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति
राजकीय शिक्षक संघ ने निदेशक, माध्यमिक शिक्षा उत्तराखण्ड को पत्र लिखकर संगठन के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने स्पष्ट किया है कि जुलाई 2023 में गठित वर्तमान प्रांतीय कार्यकारिणी पूरी तरह वैध है और इसका गठन माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार राजकीय इंटर कॉलेज, अल्मोड़ा में हुआ था।
संघ ने यह भी बताया कि वह उत्तर प्रदेश सेवा संघ नियमावली 1979 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त संगठन है, और संघ के संविधान के प्रस्तर 8 के अनुसार प्रांतीय अध्यक्ष को कार्यकारिणी का कार्यकाल एक सत्र या एक वर्ष तक बढ़ाने का अधिकार प्राप्त है। इसी प्रावधान के तहत वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाया गया है, जिसकी विधिवत सूचना 22 जून 2025 और पुनः 11 अगस्त 2025 को निदेशालय को भेजी जा चुकी है।
संघ ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पूर्ववर्ती कार्यकारिणी लगातार छह वर्षों तक कार्य करती रही, और उस समय किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया गया। वर्तमान कार्यकारिणी ने भी चुनाव प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी पहले ही पत्रांक 249/अधिवेशन/2025-26 दिनांक 06.05.2025 को निदेशालय को दे दी थी।
इसके अतिरिक्त जुलाई 2025 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के चलते लागू आचार संहिता और अगस्त 2025 में उत्तरकाशी समेत राज्य के कई हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदा के कारण कुछ इकाइयों के चुनाव नहीं हो सके हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि निदेशक की ओर से अनावश्यक हस्तक्षेप जारी रहा, तो संगठन न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी निदेशक की होगी।
संघ का आरोप है कि निदेशालय की ओर से भेजा गया हालिया पत्र संगठन की प्रमुख मांगों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।अंत में संघ ने निदेशक से अपील की है कि संरक्षक के नाते वे संगठन की लंबित मांगों के समाधान की दिशा में तत्परता दिखाएं, ताकि शिक्षकगण अपने मूल कर्तव्यों पर एकाग्र हो सकें।
